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भ्रष्ट व्यापार चमचागिरी खुसबू हिंदी कविता कहानी निर्दयी जनता ईमानदार कोई नहीं फाड़ भ्रष्ट व्यवस्था निगल बच्चे मजबूरी इंसानियत वक्त समतल मेहनत बेकार है चन्दन धरती

Hindi भ्रष्ट समाज Poems